हरियाली तीज 2026 मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा
हरियाली तीज एक अत्यंत लोकप्रिय हिंदू पर्व है, जिसे विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है और प्रेम, समर्पण तथा वैवाहिक सुख का संदेश देता है। साथ ही यह मानसून के मौसम की हरियाली और प्रकृति की सुंदरता का भी उत्सव है।
वर्ष 2026 में हरियाली तीज और भी खास हो जाती है क्योंकि यह भारत के स्वतंत्रता दिवस के साथ मनाई जाएगी। आइए जानते हैं हरियाली तीज 2026 मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम और व्रत कथा की पूरी जानकारी।
हरियाली तीज 2026 की तिथि और दिन
वर्ष 2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह पर्व श्रावण मास में आता है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह भारत के स्वतंत्रता दिवस के साथ पड़ता है। व्रत का निर्धारण त्रितीया तिथि के अनुसार किया जाता है।
हरियाली तीज 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा समय
हरियाली तीज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका शुभ मुहूर्त होता है।
त्रितीया तिथि का समय
- त्रितीया तिथि प्रारंभ: 14 अगस्त 2026, शाम 06:47 बजे
- त्रितीया तिथि समाप्त: 15 अगस्त 2026, शाम 05:29 बजे
15 अगस्त 2026 को सूर्योदय के समय त्रितीया तिथि होने के कारण व्रत और पूजा इसी दिन की जाएगी।
सूर्योदय के बाद का प्रातःकाल पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस समय पूजा करने से वैवाहिक सुख, समृद्धि और खुशहाली प्राप्त होने की मान्यता है।
हरियाली तीज पूजा विधि – चरण दर चरण
हरियाली तीज की पूजा विधि सरल और पारंपरिक है।
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं और मेहंदी लगाती हैं, जो सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
इसके बाद व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती तथा भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री जैसे चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और मेहंदी अर्पित करें।
दीपक और धूप जलाकर पूजा करें तथा हरियाली तीज व्रत कथा का श्रवण करें। अंत में शिव-पार्वती की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
हरियाली तीज व्रत कथा
हरियाली तीज की कथा माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी है।
माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अनेक जन्मों तक तप किया। अपने अंतिम जन्म में उन्होंने श्रावण मास की त्रितीया तिथि पर बालू का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की।
उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत वैवाहिक सुख और सौभाग्य के लिए किया जाता है।
हरियाली तीज व्रत नियम – क्या करें और क्या न करें
व्रत के दौरान नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुछ फलाहार करती हैं।
क्या करें
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- हरे या पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
- श्रद्धा से पूजा करें।
- व्रत कथा सुनें।
- सकारात्मक विचार रखें।
क्या न करें
- क्रोध और नकारात्मकता से बचें।
- पूजा विधि की उपेक्षा न करें।
- व्रत जल्दबाजी में न तोड़ें।
- धार्मिक परंपराओं का अनादर न करें।
इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
हरियाली तीज का महत्व
हरियाली तीज प्रेम, भक्ति और प्रकृति का उत्सव है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है।
सावन की हरियाली के बीच महिलाएं झूले झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं, मेहंदी लगाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मनाती हैं।
हरियाली तीज 2026 मुहूर्त के अनुसार पूजा करने से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है।
हरियाली तीज प्रेम, भक्ति और सौभाग्य का पावन पर्व है। 15 अगस्त 2026 को श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा कर भगवान शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
Q1: हरियाली तीज 2026 कब मनाई जाएगी?
वर्ष 2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह पर्व श्रावण मास में आता है और इस वर्ष भारत के स्वतंत्रता दिवस के साथ भी मनाया जाएगा।
Q2: हरियाली तीज 2026 में त्रितीया तिथि का समय क्या है?
त्रितीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 06:47 बजे प्रारंभ होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 05:29 बजे समाप्त होगी। सूर्योदय के समय त्रितीया तिथि होने के कारण व्रत और पूजा 15 अगस्त को की जाएगी।
Q3: हरियाली तीज की पूजा विधि क्या है?
हरियाली तीज पर स्नान करके स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण किए जाते हैं। भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा कर बेलपत्र, धतूरा, फूल तथा श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है और व्रत कथा सुनकर आरती की जाती है।
Q4: हरियाली तीज व्रत कथा का मुख्य संदेश क्या है?
हरियाली तीज व्रत कथा माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए की गई कठोर तपस्या पर आधारित है। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
Q5: हरियाली तीज व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें?
व्रत के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, श्रद्धा से पूजा करें और व्रत कथा सुनें। क्रोध, नकारात्मकता, पूजा की उपेक्षा और धार्मिक परंपराओं का अनादर करने से बचना चाहिए।